रविवार, 1 जनवरी 2017

शिक्षा

राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति (एनपीई), 1986/92 में सुस्‍पष्‍ट शिक्षा की भूमिका एवं सार इसको तैयार किए जाने के 25 वर्ष बाद भी सतत् रूप से प्रासंगिक है, राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति (एनपीई) में कहा गया :-
  • हमारी राष्‍ट्रीय अवधारणा में शिक्षा सभी के लिए आवश्‍यक है, यह हमारे चहुमुखी विकास के लिए अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण है।
  • शिक्षा की संस्‍कृति के संदर्भ में भी भूमिका है। यह सवेंदनाओं एवं अवधारणाओंको परिष्‍कृत करती है, जो राष्‍ट्रीय लगाव, वैज्ञानिक प्रवृत्ति तथा बुद्धि एवं आत्‍म का का स्‍वतंत्रता में उल्‍लेखनीय योगदान प्रदान करती है – इस प्रकार समाजवाद, धमनिरपेक्षता तथा लोकतंत्र के लक्ष्‍यों को आगे बढाती है, जिन्‍हें हमारे संविधान में प्रतिष्‍ठापित किया गया है।
  • शिक्षा अर्थव्‍यवस्‍था के विभिन्‍न स्‍तरों हेतु जनशक्ति का विकास करती है। यह एक ऐसी नीवं भी प्रदान करती है जिस पर अनुसंधान एवं विकास फलता-फुलता है, जो राष्‍ट्र की आत्‍म-निर्भरता की अंतिम गारंटी है।
  • सार रूप में, शिक्षा वर्तमान एवं भविष्‍य का विशिष्‍ट निवेश है। राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति का यही मुख्‍य सिद्धांत है।
वर्ष 2010 में राष्‍ट्र ने उस समय एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की जब अनुच्‍छेद 21-क तथा नि:शुल्‍क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम (आरटीई), 2009 दिनांक 1 अप्रैल, 2010 से लागू किया गया। अनुच्‍छेद 21-क एवं आरटीई अधिनियम का प्रवर्तन सार्वभौमिक प्रारंभिक शिक्षा के लिए हमारे राष्‍ट्र के संघर्ष की दिशा में एक महत्‍वपूर्ण कदम को दर्शाता है। आरटीई अधिनियम को इस अवधारणा के साथ लागू किया गया है कि समानता, सामाजिक न्‍याय एवं लोकतंत्र के मूल्‍यों तथा न्‍यायपूर्ण एवं मानवीय सवेंदनाओं से परिपूर्ण समाज के सृजन के लक्ष्‍य को केवल सभी के लिए समावेशी प्रारंभिक शिक्षा के प्रावधान द्वारा ही प्राप्‍त किया जा सकता है।
राष्‍ट्र की मानव संभावना का पूर्ण दोहन करने के लिए सभी को समान गुणवत्‍ता की शिक्षा प्रदान के दृष्टिकोण को ध्‍यान में रखते हुए विभाग ने निम्‍नलिखित लक्ष्‍य निर्धारित किए है :-
  • राज्‍यों/संघ राज्‍य क्षेत्रों की सहभागिता से शिक्षा के राष्‍ट्रीय एवं सम्‍पूर्णात्‍मक गुण को सुदृढ़ करना।
  • सवैंधानिक मूल्‍यों के लिए प्रतिबद्ध समाज का निर्माण करने के लिए स्‍कूल शिक्षा और साक्षरता की गुणवत्‍ता एवं मानकों में सुधार करना।
  • शिक्षा का अधिकान अधिनियम के अंतर्गत प्रदत्‍त अधिकारों के अनुरूप प्रारंभिक शिक्षा का सार्वभौमिकरण।
  • गुणवत्‍तापरक माध्‍यमिक शिक्षा हेतु अवसरों का सार्वभौमिकरण।
  • एक पूर्ण साक्षर समाज की स्‍थापना करना।
इन लक्ष्‍यों को विभाग के निम्‍नलिखित मूल्‍य कार्यक्रमों के माध्‍यम से प्राप्‍त किया जाएगा :
  • प्रारंभिक शिक्षा : सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए) एवं मध्‍याह्न भोजन (एमडीएम)
  • माध्‍यमिक शिक्षा : राष्‍ट्रीय माध्‍यमिक शिक्षा अभियान (आरएमएसए), मॉडल स्‍कूल,
  • व्‍यावसायिक शिक्षा, बालिका छात्रावास, विक्‍लांगों हेतु समावेशी शिक्षा, स्‍कूलों में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी।
  • प्रौढ़ शिक्षा : साक्षर भारत
  • अध्‍यापक शिक्षा : अध्‍यापक शिक्षा के सुदृढ़ीकरण हेतु योजना
  • महिला शिक्षा : महिला समाख्‍या
  • अल्‍पसंख्‍यक शिक्षा : मदरसों में गुणवत्‍तापरक शिक्षा प्रदान करने की योजना (एसपीक्‍यूईएम)
  • अल्‍पसंख्‍यक संस्‍थाओं का अवसंरचना विकास (आईडीएमआई)

मिशन

विभाग प्रयास करता है :
  • प्रारंभिक स्‍तर पर सभी बच्‍चों को नि:शुल्‍क एवं अनिवार्य शिक्षा प्रदान करना।
  • शिक्षा के राष्‍ट्रीय एवं सम्‍पूर्णात्‍मक गुण को सुदृढ़ करने के लिए राज्‍यों एवं संघ राज्‍यों क्षेत्रों का सहयोग करना।
  • गुणवत्‍तापरक स्‍कूल शिक्षा एवं साक्षरता की सहायता से एक ऐसे समाज का निर्माण करना जो संवैधानिक मूल्‍यों के लिए प्रतिबद्ध हो।
  • गुणवत्‍तापरक माध्‍यमिक शिक्षा हेतु सार्वभौमिक अवसर प्रदान करना।

लक्ष्‍य

देश के प्रत्‍येक पात्र विद्यार्थी के लिए माध्‍यमिक शिक्षा के सपने को साकार करने के लिए विभाग के लक्ष्‍यों को सुस्‍पष्‍ट तौर पर निर्धारित किया गया है। इसके कार्य है :
  • मौजूदा स्‍कूलों एवं नई संस्‍थाओं की स्‍थापना के माध्‍यम से स्‍कूलों के नेटवर्क को विस्‍तारित करते हुए गुणवत्‍तापरक माध्‍यमिक शिक्षा की सुलभता को बढ़ाना।
  • अब तक वंचित रखे गए लाभवंचित समूहों एवं कमजोर वर्गों को शामिल करते हुए माध्‍यमिक शिक्षा प्रणाली में समानता लाना।
  • मौजूदा संस्‍थाओं को सहायता प्रदान कर तथा नई संस्‍थाओं की स्‍थापना कर गुणवत्‍ता सुनिश्चित करना एवं शिक्षा के मानकों को सुधारना।
  • सांस्‍थनिक एवं प्रणालीगत सुधारों के अर्थों में नीति स्‍तर के बदलाव प्रारंभ करना जिससे विश्‍व स्‍तरीय माध्‍यमिक शिक्षा पाठ्यक्रम को और बढ़ावा मिले जो बच्‍चों में प्रतिभा को सृजित कर सके।

शिक्षा का महत्व

घर शिक्षा प्राप्त करने पहला स्थान है और सभी के जीवन में अभिभावक पहले शिक्षक होते हैं। हम अपने बचपन में, शिक्षा का पहला पाठ अपने घर विशेषरुप से माँ से से प्राप्त करते हैं। हमारे माता-पिता जीवन में शिक्षा के महत्व को बताते हैं। जब हम 3 या 4 साल के हो जाते हैं, तो हम स्कूल में उपयुक्त, नियमित और क्रमबद्ध पढ़ाई के लिए भेजे जाते हैं, जहाँ हमें बहुत सी परीक्षाएं देनी पड़ती है, तब हमें एक कक्षा उत्तीर्ण करने का प्रमाण मिलता है। एक-एक कक्षा को उत्तीर्ण करते हुए हम धीरे-धीरे आगे बढ़ते हैं, जब तक कि, हम 12वीं कक्षा को पास नहीं कर लेते। इसके बाद, तकनीकी या पेशेवर डिग्री की प्राप्ति के लिए तैयारी शुरु कर देते हैं, जिसे उच्च शिक्षा भी कहा जाता है। उच्च शिक्षा सभी के लिए अच्छी और तकनीकी नौकरी प्राप्त करने के लिए बहुत आवश्यक है।
हम अपने अभिभावकों और शिक्षक के प्रयासों के द्वारा अपने जीवन में अच्छे शिक्षित व्यक्ति बनते हैं। वे वास्तव में हमारे शुभचितंक हैं, जिन्होंने हमारे जीवन को सफलता की ओर ले जाने में मदद की। आजकल, शिक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए बहुत सी सरकारी योजनाएं चलायी जा रही हैं ताकि, सभी की उपयुक्त शिक्षा तक पहुँच संभव हो। ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को शिक्षा के महत्व और लाभों को दिखाने के लिए टीवी और अखबारों में बहुत से विज्ञापनों को दिखाया जाता है क्योंकि पिछड़े ग्रामीण क्षेत्रों में लोग गरीबी और शिक्षा की ओर अधूरी जानकारी के कारण पढ़ाई करना नहीं चाहते हैं।
पहले, शिक्षा प्रणाली बहुत ही महंगी और कठिन थी, गरीब लोग 12वीं कक्षा के बाद उच्च शिक्षा प्राप्त करने में सक्षम नहीं थे। समाज में लोगों के बीच बहुत अन्तर और असमानता थी। उच्च जाति के लोग, अच्छे से शिक्षा प्राप्त करते थे और निम्न जाति के लोगों को स्कूल या कॉलेज में शिक्षा प्राप्त करने की अनुमति नहीं थी। यद्यपि, अब शिक्षा की पूरी प्रक्रिया और विषय में बड़े स्तर पर परिवर्तन किए गए हैं। भारतीय सरकार के द्वारा सभी के लिए शिक्षा प्रणाली को सुगम और कम महंगी करने के लिए बहुत से नियम और कानून बनाकर लागू किया है। सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण, दूरस्थ शिक्षा प्रणाली ने उच्च शिक्षा को सस्ता और सुगम बनाया है, ताकि पिछड़े क्षेत्रों, गरीबों और मध्यम वर्ग के लोगों के लिए भविष्य में समान शिक्षा और सफलता प्राप्त करने के अवसर मिलें। भलीभाँति शिक्षित व्यक्ति देश के मजबूत आधार स्तम्भ होते हैं और भविष्य में इसको आगे ले जाने में नेतृत्व करते हैं। इस तरह, शिक्षा वो उपकरण है, जो जीवन, समाज और राष्ट्र में सभी असंभव स्थितियों को संभव बनाती है।